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तीर्थ नगरी को बड़ी सौगात : सौर ऊर्जा से दमकेंगे ओंकारेश्‍वर के घाट

तीर्थ नगरी को बड़ी सौगात : सौर ऊर्जा से दमकेंगे ओंकारेश्‍वर के घाट

omkareshwar-ghat-lightend-with-solar-energyओंकारेश्वर (खंडवा)। तीर्थनगरी ओंकारेश्वर का परिक्रमा मार्ग और समस्त घाट अब सौर ऊर्जा की रोशनी से जगमगाएंगे। भारतीय ऊर्जा विकास निगम ने ओंकारेश्वर में करीब 450 सौर लैंप लगाने की अनुमति नगर पंचायत को दे दी है। सावन माह के पहले घाटों और परिक्रमा मार्ग पर लैंप लगाने का काम पूरा कर दिया जाएगा। इससे यहां दर्शन करने पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी सौगात के रूप में देखा जा रहा है।

रविवार को भारतीय ऊर्जा विकास निगम के मुख्य सचिव उमेश त्रिपाठी ने ओंकारेश्वर पहुंचकर ज्योतिर्लिंग दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने ओंकारेश्वर को रोशन करने के लिए सौर उर्जा का इस्तेमाल करने की बात कही।

मुख्य सचिव श्री त्रिपाठी के साथ आए मुख्य अभियंता बीके पटेल व उनकी टीम ने नर्मदा के घाटों का निरीक्षण किया। ओंकार पर्वत की परिक्रमा भी अधिकारियों ने की। यहां नगर पंचायत की ओर से विद्युत वितरण की स्थायी व्यवस्था नहीं है। श्रद्धालुओं की सुविधा को दृष्टिगत रखते हुए सौर लैंप लगाने का निर्णय लिया गया। तहसीलदार मुकेश सोनी ने बताया कि सौर लैंप जून के अंतिम सप्ताह तक लगा दिए जाएंगे।

इसके लिए नगर पंचायत द्वारा उर्जा विकास निगम को स्थान चयनित करके देना है। उल्लेखनीय है कि विशेष त्योहारों पर नगर पंचायत द्वारा विद्युत व्यवस्था कर दी जाती है लेकिन ब्रह्ममुहूर्त में स्नान के लिए जाने वाले संतों व श्रद्धालुओं को प्रतिदिन अंधेरे के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ता है। रोशनी नहीं होने से घाटों पर कई बार श्रद्धालु गिर भी जाते हैं। जगह-जगह सौर लैंप लगने से नर्मदा के घाटों का सौंदर्य तो बढ़ेगा ही वहीं श्रद्धालुओं के लिए भी यह व्यवस्था सुविधाजनक रहेगी।

67 लाख रुपए से अधिक का प्रोजेक्ट
नर्मदा के किनारे ब्रह्मपुरी घाट, नर्मदा-कावेरी संगम घाट, चक्रतीर्थ घाट, केवलराम घाट, कोटीतीर्थ घाट, गौमुख घाट, नागर घाट, अभय घाट तथा ओंकारमठ के सामने पिछले भाग में सौर लैंप लगेंगे। इसी तरह परिक्रमा मार्ग पर भी यह व्यवस्था रहेगी। करीब 450 लैंप लगाने का काम उर्जा विकास निगम द्वारा ही किया जाएगा।
एक सौर लैंप की कीमत 15 हजार रुपए बताई जा रही है। इस दृष्टि से करीब 67 लाख 50 हजार रुपए के लैंप ओंकारेश्वर में लगना है। लैंप लगने के बाद इनकी देखरेख भी उर्जा विकास निगम के ही हाथों में रहेगी।

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